AI एक्सप्लेनर वीडियो

ऐसे एक्सप्लेनर वीडियो जो एक आइडिया को साफ़ समझा दें

एक्सप्लेनर वीडियो का एक ही काम है: जो बात किसी को एक मिनट पहले समझ नहीं आ रही थी, वह समझ आ जाए। मुश्किल हिस्सा एनिमेशन नहीं है, बल्कि यह तय करना है कि क्या छोड़ना है और बाकी किस क्रम में आएगा।

Accrobrief सीधे आइडिया से शुरू करता है। उसे टॉपिक, वेब पेज या स्क्रिप्ट दें, वह आइडिया का नक्शा बनाता है, उसे सीन में बांटता है, हर पॉइंट को समझाने वाली तस्वीर देता है और वॉइस-ओवर व सबटाइटल जोड़ता है।

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Accrobrief vs एजेंसी से बनवाया एक्सप्लेनर — एक नज़र में

Accrobriefएजेंसी से बनवाया एक्सप्लेनर
आपको क्या देना हैटॉपिक, वेब पेज या स्क्रिप्टब्रीफ़, फिर रिव्यू के कई राउंड
कितना समयकुछ मिनट, और जितनी बार चाहें बदलाव करेंहर रिवीज़न में हफ़्तों
बदलावचैट में कहें या एक सीन एडिट करेंस्टूडियो के साथ एक और राउंड
किसके लिए सबसे अच्छाएक कॉन्सेप्ट को साफ़ समझाने के लिएऐसी ब्रांड फ़िल्म जिसे इंसानी डायरेक्टर चाहिए

यह कैसे काम करता है

  1. 01

    आइडिया दें

    टॉपिक लिखें, किसी पब्लिक वेब पेज का लिंक पेस्ट करें, या अपनी लिखी स्क्रिप्ट पेस्ट करें।

  2. 02

    ढांचा तय होता है

    Accrobrief ऑडियंस और लक्ष्य समझता है, फिर आइडिया को कारण, असर और लय के साथ सीन में बांटता है।

  3. 03

    हर सीन बनता है

    हर पॉइंट के लिए अलग विज़ुअल बनता है, और कैमरा मूव दिखाते हैं कि हिस्से आपस में कैसे जुड़ते हैं।

  4. 04

    आवाज़ और सबटाइटल जोड़ें

    अंग्रेज़ी या चीनी नैरेशन तस्वीर के साथ सिंक होता है; बिना आवाज़ देखने वालों के लिए सबटाइटल चालू कर सकते हैं।

  5. 05

    देखें और सुधारें

    हर सीन तैयार होते ही प्रीव्यू करें। चैट में बदलाव मांगें या सीधे किसी सीन को दोबारा लिखें, फिर एक्सपोर्ट करें।

स्टाइल से पहले ढांचा

पहले आइडिया का नक्शा बनता है, इसलिए सीन किसी टेम्पलेट के बजाय समझाने के तर्क के हिसाब से चलते हैं।

हर पॉइंट की अपनी तस्वीर

हर सीन उसी पॉइंट के लिए बनता है जो वह कहता है, आम स्टॉक क्लिप से नहीं भरा जाता।

बदलाव करना आसान

अगर एक सीन ठीक न लगे, तो सिर्फ़ उसे दोबारा लिखें। बाकी वीडियो वैसा ही रहता है।

एक्सप्लेनर, डेमो या लॉन्च वीडियो?

एक्सप्लेनर उस व्यक्ति के लिए "यह क्या है और क्यों ज़रूरी है" का जवाब देता है जिसे कोई संदर्भ नहीं पता। डेमो उसके लिए "यह कैसे काम करता है" बताता है जिसे पहले से दिलचस्पी है। लॉन्च वीडियो उसे "अभी क्यों" बताता है जो आपको पहले से जानता है।

तीनों को अलग कहानी चाहिए। जब कॉन्सेप्ट ही मुख्य बात हो तो टॉपिक से शुरू करें; जब प्रोडक्ट मुख्य बात हो तो अपने प्रोडक्ट पेज से।

छोटा करना ही असली काम क्यों है

एक मिनट में कुछ समझाने को कहा जाए, तो ज़्यादातर लोग नब्बे सेकंड की डिटेल बना देते हैं। दर्शक के पास पकड़ने को कुछ नहीं होता और उसे कुछ याद नहीं रहता।

पहला कट देखें कि उसमें क्या बचा है। अगर किसी सीन में बहुत ज़्यादा है, तो उसे बांटने या छोटा करने को कहें; अगर शुरुआत बहुत कुछ मानकर चलती है, तो ऐसी शुरुआत मांगें जो पहले समस्या समझाए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

AI से एक्सप्लेनर वीडियो कैसे बनाएं?

+

Accrobrief में टॉपिक लिखें, किसी पब्लिक वेब पेज का लिंक या स्क्रिप्ट पेस्ट करें। यह कहानी लिखता है, सीन-दर-सीन विज़ुअल बनाता है और वॉइस-ओवर व सबटाइटल जोड़ता है। बाद में आप किसी भी सीन को बदल सकते हैं।

एक्सप्लेनर वीडियो कितना लंबा होता है?

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टॉपिक और स्क्रिप्ट वाले एक्सप्लेनर उतने ही लंबे होते हैं जितना उनका नैरेशन, ज़्यादा से ज़्यादा 12 सीन। वेब पेज या आइडिया से बने वीडियो पेड प्लान पर 10 से 45 सेकंड और फ्री प्लान पर 10 से 15 सेकंड के होते हैं।

क्या पहले स्क्रिप्ट चाहिए?

+

नहीं। कुछ शब्दों का टॉपिक काफी है। अगर आपके पास स्क्रिप्ट है, तो स्क्रिप्ट मोड हर शब्द जस का तस रखता है।

क्या एनिमेशन आना ज़रूरी है?

+

नहीं। कोई टाइमलाइन या कीफ़्रेम एडिटर सीखने की ज़रूरत नहीं। आप नतीजा देखते हैं और आसान शब्दों में बदलाव मांगते हैं।

वॉइस-ओवर किन भाषाओं में हो सकता है?

+

फ़िलहाल अंग्रेज़ी या चीनी में।

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जो आपके पास पहले से है, उसी से शुरू करें।

फ्री में आज़माएं। पहले ब्राउज़र में वॉटरमार्क वाला प्रीव्यू देखें।

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